10
Dec
Posted by महावीर in कविता, सीमा गुप्ता. 24 Comments
सीमा गुप्ता की दो कविताएं

मृगतृष्णा
कैसी ये मृगतृष्णा मेरी
ढूँढ़ा तुमको तकदीरों में
चन्दा की सब तहरीरों में
हाथों की धुँधली लकीरों में
मौजूद हो तुम मौजूद हो तुम
इन आंखों की तस्वीरों में
कैसी ये ………………….
अम्बर के झिलमिल तारों में
सावन में रिमझिम फुहारों में
लहरों के उजले किनारों में
तुमको पाया तुमको पाया
प्रेम-विरह अश्रुधारों में
कैसी ये…………………….
ढूँढ़ा तुमको दिन रातों में
ख्वाबों ख्यालों जज्बातों में
उलझे से कुछ सवालातों में
बसते हो तुम बसते हो तुम
साँसों की लय में बातों में
कैसी ये……………………..
ढूँढी सब खमोश अदायें
गुमसुम खोयी खोयी सदायें
बोझिल साँसें गर्म हवायें
मुझे दिखे तुम मुझे दिखे तुम
हर्फ बने जब उठी दुआयें
कैसी ये मृगतृष्णा मेरी
“यादें”
सीमा गुप्ता
बहुत रुला जाती हैं , दिल को जला जातीं हैं ,
नीदों मे जगा जाती हैं , कितना तड़पा जातीं हैं ,
“यादें” जब भी आती हैं ”
भीगे भीगे अल्फाजों को , लबों पर लाकर ,
दिल के जज्बातों को , फ़िर से दोहरा जाती हैं ,
“यादें जब भी आती हैं ”
खाली अन्ध्यारे मन के , हर एक कोने में ,
बीते लम्हों के टूटे मोती , बिखरा जाती हैं ,
“यादें जब भी आती है ”
हम पे जो गुजरी थी , उन सारी तकलीफों के ,
दिल मे दबे हुए , शोलों को भड़का जाती हैं ,
“यादें जब भी आती हैं ”
कितना सता जाती हैं , दीवाना बना जाती हैं ,
हर जख्म दुखा जाती हैं , फिर तन्हा कर जाती हैं ,
“यादें जब भी आती हैं”
Posted by महावीर on December 10, 2008 at 2:16 pm
सीमा गुप्ता जी का ‘महावीर’ ब्लॉग पर हार्दिक अभिनंदन।
आपकी कविताओं में कशिश है, भावनाओं से ओत-प्रोत,
मन की व्यथा उजागर करती हुई सुंदर शब्दों के सहारे
मन को छू जाती हैं।
महावीर शर्मा
Posted by mahendra mishra on December 10, 2008 at 3:07 pm
बहुत ही सुंदर बिंदास रचना जो मर्म को छू जाती है .धन्यवाद.
Posted by mehek on December 10, 2008 at 3:31 pm
waah bahut hi sundar bhav
Posted by sameer lal on December 10, 2008 at 3:54 pm
सीमा जी की रचनाओं के तो हम यूँ भी कायल है..जबरदस्त शब्द संयोजन और भावनाओं से ओत प्रोत रचनाऐं स्वतः ही दिल में तरलता से उतर जाती है. महावीर ब्लॉग पर आना वो डिजर्व करती हैं. आपका आभार.
Posted by arsh on December 10, 2008 at 5:01 pm
bahot khub seema ji ke kavitawon ka to ese hi main murid hun… upar se mahavir ji ki ye prastuti aur bhi behatar… aap dono ko dhero badhai….
regards
arsh
Posted by Bavaal on December 10, 2008 at 5:11 pm
आदरणीय शर्मा साहेब,
बड़ा आभार आपका सीमाजी की अतिसुन्दर रचनाओं को प्रस्तुत करने के लिए. आप मोहतरमां तो बयां के बाहर फ़ित्रत पेश कर चली हैं, सारा ब्ला॓ग्जगत इन्हें बेइन्तेहां पसन्द करता है. देखिये मेरा तो मानना है के आगे चलकर ये बेहतरीन गुल्द्स्ता साबित होंगी ब्ला॓ग सहित्य जगत के लिये. आमीन.
Posted by vidhu on December 10, 2008 at 5:35 pm
sundar kavitaa,sundar photograph,isliye sundar aur dher si badhai….
Posted by pran sharma on December 10, 2008 at 6:53 pm
MAHAVIR JEE,
AAPKE BLOG PAR AANAA BADAA HEE SUKHAD LAGTA HAI.AAP HAR
RACHNAKAAR KEE RACHNA BADEE AATMIATAA SE PRASTUT KARTE HAIN.
RACHNAKAAR KEE PRASHANSHAA MEIN JAB JAB AAPKE MEETHEE-MEETHEE
SHABD PADHNE KO MILTE HAIN TO MUN JHOOM UTHTAA HAI.
SEEMA GUPTA KISEE TAREEF KEE MOHTAAZ NAHIN HAIN.UNKEE
RACHNAON MEIN PYAAR CHHIPA HAI,PYAAR KE SAATH-SAATH DARD BHEE.
DARASL YE PYAAR AUR YE DARD YUG-YUG SE CHALAA AA RAHAA HAI HAR
KAVI MEIN.SEEMA GUPTA KEE RACHNAON KO PADH KAR KAVIVAR SUMITRA
NANDAN PANT KEE YE PANKTIAN YAAD AA JAATEE HAIN–
VIYOGEE HOGAA PAHLAA KAVI AAH SE UPJAA HOGAA GAAN
NIKALKAR AANKHON SE CHUCHAAP BAHEE HOGEE KAVITA ANJAAN
SEEMA GUPTA MAHADEVI VERMA KEE TARAH HEE MAHAAN
KAVYITRI BAN SAKTEE HAI BASHARTE CHHANDON KAA GYAAN UNKO HO JAAYE.
SEEMA GUPTA JEE KEE DONO RACHNAAYEN MUN KO BHAPOOR
CHHOTEE HAIN.HAAN,ZAZBAAT AUR ALFAAZ SHABDON KAA PRAYOG GALAT
HUA HAI ZAZBAATON AUR ALFAAZON KE ROOP MEIN UNKEE RACHNAAON MEIN.
SEEMA GUPTA JEE SE BAHUT ASHAYEN HAIN.
Posted by neeraj on December 10, 2008 at 7:57 pm
सीमा जी की रचनाओं के हम पुराने प्रशंशक हैं…उनकी रचनाएँ दिल से लिखी जाती हैं और सीधे दिल में प्रवेश कर जाती हैं…आप के ब्लॉग पर उन्हें पढ़ कर बहुत आनंद आया..आप का शुक्रिया…
नीरज
Posted by Lavanya on December 10, 2008 at 8:32 pm
आदरणीय महावीर जी,
आप नायाब मोती चुन कर हमेँ पढवाते हैँ
सीमाजी की कविताओँ को पढना भी सुखद रहा –
आप दोनोँ को हार्दिक बधाई
स स्नेह, सादर,
- लावण्या
Posted by seema gupta on December 11, 2008 at 4:22 am
आदरणीय महावीर जी, ‘महावीर’ ब्लॉग पर मेरी रचनाओं को अमूल्य स्थान देकर आपने मुझे जो मान सम्मान दिया है, उसके लिए मै दिल से आभारी हूँ , आप के आशीर्वाद ने हमेशा ही मुझे प्रोत्साहन दिया है , क्रप्या ये स्नेह और अपना आशीर्वाद हमेशा बनाए रखें.”
regards
Posted by seema gupta on December 11, 2008 at 4:26 am
“आदरणीय mahinder mishra je, mehek, sameer lal je, arsh, bavaal, Vidhu,Pran sharma je, Neeraj je, lavanya je, आप सभी माननीय की यहाँ उपस्तिथि से मै भावः भिवोर हूँ ….आप सभी ने हमेशा ही मुझे और मेरे लेखन को अपने विचारों और आशीर्वाद से प्रोत्सिहित किया है ….मै जानती हूँ अभी बहुत सी कमियों जैसा की आदरणीय प्राण जी ने बताया है उनको मुझे दूर करना है , मुझे उम्मीद है की एक दिन मै आप सभी की उम्मीद पर खरी उतर जाउंगी… आप सभी के आशीर्वाद और सहयोग के लिए दिल से आभार “
Posted by makrand on December 11, 2008 at 7:28 am
bahut acchi rachanayen seema ji ki lekhni se
Posted by Dr.Arvind Mishra on December 11, 2008 at 12:56 pm
बहुत भावपूर्ण !
Posted by mohan vashisth on December 11, 2008 at 1:41 pm
इन कविताओं को पढकर दिल खुश हो गया महावीर जी और सीमा जी को बधाई साथ में धन्यवाद भी दूंगा इतनी अच्छी कविताओं को पढवाने के लिए
Posted by विनय on December 11, 2008 at 6:26 pm
बहुत flow और सरलता है दोनों ही कृतियों में!
Posted by seema gupta on December 13, 2008 at 5:26 am
” Makrand je, Dr arvind mishra je, Mohan Je, vinay thanks a lot for your presence over here along with your blessings”
regards
Posted by Devi Nangrani on December 13, 2008 at 7:06 am
बहुत रुला जाती हैं , दिल को जला जातीं हैं ,
नीदों मे जगा जाती हैं , कितना तड़पा जातीं हैं ,
“यादें” जब भी आती हैं ”
Seena ji abhut hi bhav se bharpoor satya ko samne rakha hai aur sunder shabdon mein bunkar.
Main Mahavirji ko badhayi deti hoon is prayaas ke liye jo sahitya ke madhyam se hum dudte chale ja rahe hain
Devi Nangrani
Posted by seema gupta on December 13, 2008 at 10:51 am
Devi Nangrani jee, aapka yhan aana , or muje protsahan daina, maire liye kise reward se kam nahi hai…..dil se shukrgujar hun.
regards
Posted by shivraj gujar on December 16, 2008 at 3:52 pm
bahut badiya seemaji. mrigtrasna main bhavnaon ka bahav bahut hi saral or manbhavan.
badhai.
Posted by seema gupta on December 17, 2008 at 12:10 pm
@Shivraj gujar ji, aapke protsahan ka bhut bhut shukriya”
regards
Posted by rashmi prabha on December 18, 2008 at 2:13 pm
bahut hi achhi rachna lagi,is blog par seema ji ko dekhkar bahut khushi hui
Posted by seema gupta on December 22, 2008 at 12:47 pm
@ rashmi je aapkaa bhut aabhar.
regards
Posted by alka goel on January 14, 2009 at 11:58 am
your blog is too nice come n also watch me if u have some little time.