प्राण शर्मा जी की एक ग़ज़ल

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प्राण शर्मा जी की एक ग़ज़लः

परखचे अपने उड़ाना दोस्तो आसां नहीं
आपबीती को सुनाना दोस्तो आसां नहीं

ख़ूबियां अपनी गिनाते तुम रहो यूं ही सभी
ख़ामियां अपनी गिनाना दोस्तो आसां नहीं

देखने में लगता है यह हल्का फुल्का सा मगर
बोझ जीवन का उठाना दोस्तों आसां नहीं

रूठी दादी को मनाना माना कि आसान है
रूठे पोते को मनाना दोस्तो आसां नहीं

तुम भले ही मुस्कुराओ साथ बच्चों के मगर
बच्चों जैसा मुस्कुराना दोस्तो आसां नहीं

दोस्ती कर लो भले ही हर किसी से शौक से
दोस्ती सब से निभाना दोस्तो आसां नहीं

आंधी के जैसे बहो या बिजली के जैसे गिरो
होश हर इक के उड़ाना दोस्तो आसां नहीं

कोई पथरीली जमीं होती तो उग आती मगर
घास बालू में उगाना दोस्तो आसां नहीं

एक तो है तेज पानी और उस पर बारिशें
नाव कागज़ की बहाना दोस्तो आसां नहीं

आदमी बनना है तो कुछ ख़ूबियां पैदा करो
आदमी ख़ुद को बनाना दोस्तों आसां नहीं

प्राण शर्मा

31 Responses to this post.

  1. रूठी दादी को मनाना माना कि आसान है
    रूठे पोते को मनाना दोस्तो आसां नहीं

    बहुत उम्दा बात!

    Reply

  2. Posted by arsh on November 21, 2008 at 1:39 pm

    कोई पथरीली जमीं होती तो उग आती मगर
    घास बालू में उगाना दोस्तो आसां नहीं

    बहोत ही उम्दा लिखा है अपने बहोत खूब ,,
    ढेरो बधाई आपको ..

    Reply

  3. Posted by Shastri JC Philip on November 21, 2008 at 1:58 pm

    प्रिय महावीर जी,

    आज पहली बार आपके चिट्ठे पर आना हुआ. काफी समय बिताया. कई रचनायें देखीं, कई पढीं. अच्छा लगा.

    बुकमार्क कर लिया है.

    प्राण शर्मा जी की इस गजल के लिये विशेष आभार !!

    सस्नेह — शास्त्री

    Reply

  4. दोस्ती कर लो भले ही हर किसी से शौक से
    दोस्ती सब से निभाना दोस्तो आसां नहीं

    bahut khuub..

    Reply

  5. जनाबे प्राण साहिब
    आपकी खुबसूरत ग़ज़ल देखी
    आपकी तमाम ग़ज़लें जहाँ कला पक्ष से
    जीवन और सादगी की प्रतिमा हैं वहां विषय पक्ष
    से इन्सानी ज़मीर की आवाज़ भी हैं सादा शब्दों में
    बे -हद गंभीर बात कहना तो कोई आपसे सीखे
    आपकी रचनाएँ इन्सानी रिश्तों का दर्पण है
    हिन्दी ग़ज़ल को आपसे बहुत उम्मीद है

    आपके लिए मुलाहिज़ा फरमाएं
    वोह चार चाँद लगाता जिधर भी जाता था
    जिसे समझते थे ग़ालिब वोह मेरे निकला था

    चाँद शुक्ला हदियाबादी
    डेनमार्क

    Reply

  6. रूठी दादी को मनाना माना कि आसान है
    रूठे पोते को मनाना दोस्तो आसां नहीं
    तुम भले ही मुस्कुराओ साथ बच्चों के मगर
    बच्चों जैसा मुस्कुराना दोस्तो आसां नहीं
    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    ये शेर दिलको छू गये और मुस्कुराहट दे गये :)
    प्राण साहब क्या खूब लिखते हैँ आप
    और आदरणीय महावीरजी का शुक्रिया
    जो एक से बढकर एक नायाब नगीनोँ को सँजो रहे हैँ
    और जाल घर को आकर्षक बनाये हुए हैँ -
    बहुत शुभकामनाएँ आप दोनोँ को !
    बहुत स्नेह सहित,
    - लावण्या

    Reply

  7. दोस्ती कर लो भले ही हर किसी से शौक से
    दोस्ती सब से निभाना दोस्तो आसां नहीं
    आंधी के जैसे बहो या बिजली के जैसे गिरो
    होश हर इक के उड़ाना दोस्तो आसां नहीं
    कोई पथरीली जमीं होती तो उग आती मगर
    घास बालू में उगाना दोस्तो आसां नहीं

    Reply

  8. ruthe pote ko manana aasan nahi,bahut sundar gazal

    Reply

  9. वर्ग अन्तराल को बखूबे रेखांकित किया है।
    अच्छी गज़ल।

    शर्मा जी को बधाई।

    Reply

  10. वर्ग अन्तराल को बखूबी रेखांकित किया है।
    अच्छी गज़ल।

    शर्मा जी को बधाई।

    Reply

  11. रूठी दादी को मनाना माना कि आसान है
    रूठे पोते को मनाना दोस्तो आसां नहीं

    ….क्या खूब है…प्राण साब के तो हम पुराने फ़ैन हैं

    Reply

  12. ख़ूबियां अपनी गिनाते तुम रहो यूं ही सभी
    ख़ामियां अपनी गिनाना दोस्तो आसां नहीं
    रूठी दादी को मनाना माना कि आसान है
    रूठे पोते को मनाना दोस्तो आसां नहीं
    आदमी बनना है तो कुछ ख़ूबियां पैदा करो
    आदमी ख़ुद को बनाना दोस्तों आसां नहीं
    गुरुदेव की ऐसी अनोखी ग़ज़ल को पढ़ कर क्या कहा जा सकता है…सिर्फ़ नत मस्तक ही हुआ जा जासकता है….और वो मैं हो रहा हूँ….शुक्रिया महावीर जी प्राण साहेब की इतनी अच्छी ग़ज़ल पढ़वाने का…
    नीरज

    Reply

  13. कोई पथरीली जमीं होती तो उग आती मगर
    घास बालू में उगाना दोस्तो आसां नहीं

    ” bhut sunder abhevykti, jindge ke sach ko sarthk krtee rachna..”

    regards

    Reply

  14. हर शे’र जैसे एक-एक मोती है जड़ा हुआ।
    आभार और बधाई।

    Reply

  15. डा. रमा द्विवेदीsaid….

    बहुत खास अभिव्यक्ति है…हर शेर बेहतरीन है। प्राण साहब को बधाई।

    Reply

  16. आदमी बनना है तो कुछ ख़ूबियां पैदा करो
    आदमी ख़ुद को बनाना दोस्तों आसां नहीं
    bahut umda

    Reply

  17. Posted by rasprabha on November 22, 2008 at 8:09 am

    आदमी बनना है तो कुछ ख़ूबियां पैदा करो
    आदमी ख़ुद को बनाना दोस्तों आसां नहीं……
    ek utkrisht ghazal

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  18. बहुत खूब!

    Reply

  19. Posted by Sudha Om Dhingra on November 22, 2008 at 11:38 pm

    महावीर जी,
    आप के ब्लाग पर पहली बार आई हूँ,
    बहुत कुछ पढ़ा–प्राण शर्मा जी की ग़ज़लों के
    एक-एक शे’र ने बहुत कुछ कह दिया है.
    मैं महावीर जी और प्राण जी दोनों की आभारी हूँ
    जो इतनी सुंदर ग़ज़ल पढ़ने को दी.
    बहुत-बहुत बधाई,
    सस्नेह,
    सुधा ओम ढींगरा

    Reply

  20. बहुत ही खूबसूरत भाव बोध लिये प्राण जी की यह गज़ल पढ़वाने के लिये महावीर जी साधुवाद स्वीकारें

    Reply

  21. ख़ूबियां अपनी गिनाते तुम रहो यूं ही सभी
    ख़ामियां अपनी गिनाना दोस्तो आसां नहीं
    तुम भले ही मुस्कुराओ साथ बच्चों के मगर
    बच्चों जैसा मुस्कुराना दोस्तो आसां नहीं
    दोस्ती कर लो भले ही हर किसी से शौक से
    दोस्ती सब से निभाना दोस्तो आसां नहीं

    शब्दों के फूल तो लाती रहती हैं गज़लें
    मगर बहारें भी छा जाएँ ये आसां नहीं

    Reply

  22. ख़ूबियां अपनी गिनाते तुम रहो यूं ही सभी
    ख़ामियां अपनी गिनाना दोस्तो आसां नहीं
    तुम भले ही मुस्कुराओ साथ बच्चों के मगर
    बच्चों जैसा मुस्कुराना दोस्तो आसां नहीं
    दोस्ती कर लो भले ही हर किसी से शौक से
    दोस्ती सब से निभाना दोस्तो आसां नहीं

    शब्दों के फूल तो लाती रहती हैं गज़लें
    यूं बहारों का भी छा जाना दोस्तो आसां नहीं

    Reply

  23. आदरणीय शर्मा जी
    “महावीर” पर इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल और अन्य रचनाओं के प्रकाशन में आपकी अनुमति
    के लिए मैं आपका आभारी हूं। आपकी रचनाओं से नव-लेखकों के लिए बहुत कुछ
    सीखने को मिलता है और मिलता रहा है।
    आशा है आगे भी आप इसी तरह अपनी रचनाओं से हमें और हमारे पाठकों का
    मार्गदर्शन करते रहेंगे।
    महावीर शर्मा

    Reply

  24. प्राण शर्मा जी,

    आपकी गज़ल अभी पढ़ी। हर शेर बहुत ख़ूबसूरत है, सादा मगर गहरा। ख़ास कर ये शेर बहुत अच्छा लगा-

    एक तो है तेज पानी और उस पर बारिशें
    नाव कागज़ की बहाना दोस्तो आसां नहीं

    सादर
    मानोशी

    Reply

  25. bahut prabhvshali gazal hai. abhivyakti prakhar hai.

    Reply

  26. हर पंक्ति अच्छी लगी ,एक एक पंक्ति में बहुत कुछ है . मजा आ गया पढ़कर ..
    अभी इसे कई बार और पढूंगा ..बहुत बढ़िया ..

    Reply

  27. इतने सुंदर भाव लिखना प्राण जी आसाँ नही..! हर पंक्ति अच्छी….! बधाई..!

    Reply

  28. आदरणीय प्रणाम,
    सर्वप्रथम तो इतनी बेहतरीन ग़ज़ल के लिए साधुवाद. इसके बाद मेरी तरफ़ से क्षमा-प्रार्थना स्वीकार करें जी, जो मैं आप जैसे आलातरीन बुज़ुर्गवार से अब तक दूर था. बहुत मार्गदर्शन मिलेगा सर जी आपसे हम ब्लॉगर्स को. प्राण जी को हमारा सविनय नमन निवेदन.

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  29. मैंने गूगल ब्‍लागर पर एक चिट्रठा बनया है परन्‍तु यदि उसके कुछ भी वर्ड सर्च करते है तो वह सर्च रिजल्‍ट में नहीं आता जबकि आप लोगों का चिट्रठा सर्च रिजल्‍ट में आ जाता है मैं ऐसा क्‍या करू जिससे मेरा चिट्रठा भी सर्च रिजल्‍ट में आए कपया जल्‍दी इमेल कर बताए मेरा ईमेल और चिट्रठा इस प्रकार है http://www.money-pradeep.blogspot.com .
    email :- pradeep.bakdeeya@gmail.com

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  30. वाह, हर इक शेर पर दाद कबूल करें.

    आदमी बनना है तो कुछ ख़ूबियां पैदा करो
    आदमी ख़ुद को बनाना दोस्तों आसां नहीं

    कितनी बेहद गहराई है इस बात में. काश, सब समझ पाते कि आदमी संज्ञा नहीं, एक विशेषण है.
    आभार इस उम्दा गज़ल के लिए प्राण जी का और महावीर जी का साधुवाद.

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  31. बहुत सुन्‍दर गजल। अन्‍य रचनाकारों की रचनाएं पढवाने का शुक्रिया।

    Reply

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