देवी नागरानी की लघुकथा – ‘दो गज़ ज़मीन चाहिए’

devi_nangrani लघुकथा:

“दो गज़ ज़मीन चाहिए”
देवी नागरानी

सुधा अपनी सहेलियों के साथ कार के हिचकोलों का आनंद लेती हुई खुशनुमा माहौल का भरपूर आनंद लुटा रही थी. अक्टूबर का महीना, कार के शीशे बंद, दायें बाएँ शिकागो की हरियाली अपने आप को जैसे इन्द्रधनुषी रंगों का पैरहन पहना रही हो.

जानलेवा सुन्दरता में असुंदर कोई भी वस्तु खटक जाती है; इसका अहसास उसे तब हुआ जब उसकी सहेली ने रास्ते में एक ढाबे पर चाय के लिए कार रोकी. चाय की चुस्की लेते हुए उसी सहेली ने जिसकी कर थी, अपने बालों को हवा में खुला छोड़ते हुए चाय के ज़ायके में कुछ घोलकर कहा –
‘सुधा, अपनी कार का होना कितना जरूरी है, जब चाहो, जहाँ चाहो, आनंद बटोरने चले जाओ. यह एक जरूरत सी बन गई है. बिना उसके कहाँ बेपर परिंदे उड़ पते हैं?’

सुधा नज़रअंदाज़ न कर पाई. तीर निशाने पर बैठा था. अपनी औकात वह जानती थी और उसीका परिचय सभी सहेलियों से बिना किसी मिलावट के अपनी मुस्कान के साथ कराते हुए कहा, “मैं ज्यादा पैसे वाली तो नहीं, पर मुझे अपनी ज़रूरतों और दायरों का अहसास है. उन्हीं कम ज़रूरतों ने मुझे सिखाया है कि मुझे फ़क़त “दो गज़ ज़मीन चाहिए.”

देवी नागरानी, न्यू जर्सी, यू. एस. ए.
dnangrani@gmail.com

बुधवार, ३० सितम्बर २००९ से ६ सितम्बर २००९ तक
इसी ब्लॉग पर पढ़िये:

प्राण शर्मा की लघुकथा
‘शुभचिंतक’

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8 Comments »

  1. 1
    ashok andrey Says:

    vakei har aadmi ko phakat chh: gaj jameen hii to chahiya lekin ham log apne aham ke saamne kitnaa samajh paate hein bahut khubsurat rachnaa ke liye me devii nagraani jee ko tathaa mahavir jee ko badhai detaa hoon

    ashok andrey

  2. देवी नागरानी जी का लधु-कथा की
    प्रस्तुति बहुत बढ़िया है।
    बधाई!

  3. 3

    कम शब्द गहरी बात…एक जबरदस्त सन्देश और जीवन की तल्ख़ हकीकत का पाठ पढाती देवी दीदी की ये कहानी बेमिसाल है…
    नीरज

  4. 4

    सुन्दर संदेश देती इस रचना के देवी जी को बहुत बहुत बधाई

  5. बिलकुल सही बात कही इस लघु कथा के संदेस ने
    – देवी जी की गज़लें तो बढिया होतीं ही हैं
    पर आज ये कथा और सीख पढ़कर भी शिक्षा के साथ आनंद भी आ गया –
    धन्यवाद आ. प्राण भाई साहब व महावीर जी —
    सादर, स – स्नेह,
    – लावण्या

  6. 6

    मुझे फ़क़त छ: गज़ ज़मीन चाहिए.”nice

  7. 7

    लघुकथा अपनी लघुता में विराट दृश्य को समेट लेती है, अपना सन्देश आप तक वो पहुंचा पायी उसके लिए मैं श्री महावीर जी व् प्राण शर्मा कि आभारी हूँ जो अपना अनमोल समय हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार कि दिशा में दे रहे हैं. आप सभी का स्नेह बना रहे कदम दर कदम और आगे….

    देवी नागरानी


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