यू.के.(बेलफास्ट, आयरलैंड) से दीपक ‘मशाल’ की लघु कथा

“मुझे नहीं होना बड़ा”
दीपक ‘मशाल’

आज फिर सुबह-सुबह से शर्मा जी के घर से आता शोर सुनाई दे रहा था. मालूम पड़ा किसी बात को लेकर उनकी अपने छोटे भाई से फिर कलह हो गयी.. बातों ही बातों में बात बहुत बढ़ने लगी और जब हाथापाई की नौबत आ पहुँची तो मुझसे रहा नहीं गया. हालांकि बीच बचाव में मैं भी नाक पर एक घूँसा खा गया और चेहरे पर उनके झगड़े की निशानी कुछ खरोंचें चस्पा हो गयीं, मगर संतोष इस बात का रहा कि मेरे ज़रा से लहू के चढ़ावे से उनका युद्ध किसी महाभारत में तब्दील होने से बच गया. चूंकि मेरे और उनके घर के बीच में सिर्फ एक दीवार का फासला है, लेकिन हमारे रिश्तों में वो फासला भी नहीं. बड़ी आसानी से मैं उनके घर में ज़रा सी भी ऊंची आवाज़ में चलने वाली बातचीत को सुन सकता था. वैसे तो बड़े भाई अमित शर्मा और छोटे अनुराग शर्मा दोनों से ही मेरे दोस्ताना बल्कि कहें तो तीसरे भाई जैसे ही रिश्ते थे लेकिन अल्लाह की मेहरबानी थी कि उन दोनों के बीच आये दिन होने वाले आपसी झगड़े की तरह इस तीसरे भाई से कोई झगड़ा ना होता था.
जिस वक़्त दोनों भाइयों में झगड़ा चल रहा था तब अमित जी के दोनों बेटे, बड़ा ७-८ साल का और छोटा ४-५ साल का, सिसियाने से दाल्हान के बाहरी खम्भों ऐसे टिके खड़े थे जैसे कि खम्भे के साथ उन्हें भी मूर्तियों में ढाल दिया गया हो. मगर साथ ही उनकी फटी सी आँखें, खुला मुँह और ज़ोरों से धड़कते सीने की धड़कनों को देख उनके मूर्ति ना होने का भी अहसास होता था.
झगड़ा निपटने के लगभग आधे घंटे बाद जब दोनों कुछ संयत होते दिखे तो उनकी माँ, सुहासिनी भाभी, दोनों बच्चों के लिए दूध से भरे गिलास लेके आयी..

”चलो तुम लोग जल्दी से दूध पी लो और पढ़ने बैठ जाओ..” भाभी की आवाज़ से उनके उखड़े हुए मूड का पता चलता था
बड़े ने तो आदेश का पालन करते हुए एक सांस में गिलास खाली कर दिया लेकिन छोटा बेटा ना-नुकुर करने लगा..

भाभी ने उसे बहलाने की कोशिश की- ”दूध नहीं पियोगे तो बड़े कैसे होओगे, बेटा..”

”मुझे नहीं होना बड़ा” कहते हुए छोटा अचानक फूट-फूट कर रोने लगा.. ”मुझे छोटा ही रहने दो… भईया मुझे प्यार तो करते हैं, मुझसे झगड़ा तो नहीं करते..”

दीपक ‘मशाल’
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14 Comments »

  1. इस लघु कथा को पढ़ चुकी हूँ ..दीपक के ब्लॉग पर ..आज यहाँ फिर पढ़ कर बहुत ही ज्यादा ख़ुशी हुई..
    आपका धन्यवाद…

    • 2
      narendra kumar mohanty Says:

      Read the shorty story.In small matters we learn more.Here the little boy teaches us how to live.Really do not be complicated in life. This spoils peace and tranquality .We have no doubt tensions .But instead of taking the load of ten-sons please think of one son,who in this story spells well-MUJHE BADA NAHIN HONA.
      Sri Narendra Kumar Mohanty
      Bhukta,Bargarh,Orissa
      Pin-768045

  2. पुनर्पाठ ने फिर झकझोरा!!

  3. बड़ों के लिये….
    छोटे बच्चे का…….
    बहुत बड़ा संदेश.

  4. एक मशहूर शेर है:
    मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्‍चा
    बड़ों की देखकर दुनिया, बड़ा होने से डरता है।
    वह शेर तो एक विस्‍तृत पटल पर था लेकिन यहॉं भी यही बात लागू होती है।

  5. 6

    एक अच्छी कहानी! बच्चों के मुह से निकला सत्य कड़वे के साथ -साथ गंभीर भी होता है…

  6. 7

    महावीर सर, एक नए रचनाकार की लघुकथा को प्रसारित करने के लिए बहुत-बहुत आभार..

  7. 9
    ashok andrey Says:

    Itnee badiya laghu kathaa ke liye mai Deepak jee ko badhai detaa hoon ek chhote se bachche ke mukh se itnee gehree baat, andar tak jhakjhor gai mujhe. bahut khoob.

  8. ‘मुझे नहीं होना बड़ा’ एक सार्थक और मस्तिष्क को झकझोरने वाली कघुकथा है. दीपक ‘मशाल’ जी को एक अच्छी लघुकथा के लिए धन्यवाद और बधाई.

  9. भाई दीपक ” मशाल ” जी की कहानी अपना सही असर छोडती हुई बहुत पसंद आयी मुबारक हो !
    आपके जालघर पर नित नया पढने को मिलता रहता है ..आपकी ये बहुत बड़ी साहित्य सेवा के लिए
    आपका भी धन्यवाद आ. महावीर जी व आ. प्राण भाई साहब
    सादर,
    – लावण्या

  10. 12

    दीपक जी
    नमस्ते,
    मैंने आप को पढ़ा है मगर बारीकी से पहली बार पढ़ा है , आप के लेखन ने मान पर असर छोड़ा है. साधुवाद आप को , और आदर जोग महावर साब को की हमे पढने का अवसर प्रदान किया.
    साधुवाद

  11. 13
    rachna awasthi Says:

    Tilak Raj Kapoor ji ne jo sher sunaya hai —
    ” Mere dil ke kisi kone me ik masoom sa bachcha ,
    Badon ki dekhkar duniya , badaa hone se darta hai ”
    yeh panktiyan Ghazalkaar Rajesh Reddy ji ki hain .
    Kahaani bhi yahi kehti hai .
    Badhayi — dono rachnakaron ko !

  12. रचना अवस्‍थी जी का आभारी हूँ, शायर का नाम बताने के लिये। शायरी की दूनिया मे शेर जिन्‍दा रह जाते हैं लोगों के ज़ेह्न में शायर भले ही ग़ुमनाम हो जाये। मुझे शेर ही याद रहते हैं, खासतौर पर ऐसे मौज़ू शेर जो कभी किसी से सुने हों। राजेश रेड्डी जी को इस बेहतरीन शेर के लिये बधाई।


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