प्राण शर्मा और देवी नागरानी की लघु कथाएँ.

blind beggar climbing

लघुकथा

‘मुराद’

-प्राण शर्मा

सीता देवी ख़ुशी से फूली नहीं  समायी जब उसके कानों में उसके भांजे मोहन के ये शब्द  पड़े -“मौसीजी, वैष्णो देवी के दर्शन करने की लिए तैयार हो जाइये .  “परसों ही हम निकल पड़ेंगे. देखिये ये  टिकटें.”

सीता देवी भले ही ६५ पार कर चुकी थी और जवानों सा दमख़म नहीं था उसमें अब लेकिन वैष्णो देवी का नाम सुनते ही वह उछल पड़ी और भांजे को अपनी बांहों में भर लिया उसने .

कटरा से लेकर वैष्णो देवी  की गुफा तक का रास्ता लम्बा है. जयमाता का घोष करते हुए सीता देवी ने भांजे मोहन के साथ चढ़ाई शुरू कर दी. चेहरों पर उत्साह था दोनो के. थोड़ा रास्ता तय हुआ ही था कि सीता देवी की सांसे फूलने लगी . मोहन ने देखा तो वह घबरा उठा. घबराहट में ही बोला-        ” मौसी जी, हम वापस चलते हैं. आपके लिए मैं टट्टू की सवारी का इन्तेजाम करता हूँ”.

” टट्टू पर सवार  होकर ही देवी के द्वार मैं पहुँची तो क्या पहुँची ? मुझे तो पैदल चल कर ही वहां पहुंचना है.” सीता देवी नहीं मानी और जयमाता का लम्बा हुंकारा लेकर चढाई शुरू कर दी उसने.

मौसी और भांजा दोनों निर्विघ्न वैष्णो देवी के द्वार पर  पहुंचे.  मौसी सीता देवी की इच्छा-शक्ति पर भांजे मोहन की आँखों में आर्श्चय झलकने लगा.

प्राण शर्मा

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लघुकथा

“पत्थर दिल”

– देवी नागरानी

रमेश कब कैसे, किन हालात के कारण इतना बदल गया यह अंदाजा लगाना उसके पिता सेठ दीनानाथ के लिये मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगा । अपने घर की दहलीज पार करके उसके बंगले के सामने खड़े होकर सोचते रहे जो मान सम्मान, इज्ज़त उम्र गुजा़र कर पाई आज वहीं अपने बेटे की चैखट पर झुकेगी, वो भी इसलिये कि उसकी पत्नी राधा मरन-शैया पर लेटी अपने बेटे का मुंह देखने की रट लगाये जा रही थी – मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा ।

दरवाजे पर लगी बेल बजाते ही घर की नौकरानी ”कौन है” के आवाज़ के साथ उन्हें न पहचानते हुए उनका परिचय पूछ बैठी.

”मैं रमेश का बाप हूँ, उसे बुलाएं”  और वह चकित मुद्रा में सोचती हुई अंदर संदेश लेकर गई और तुरंत ही रोती सी सूरत लेकर लौटी.  जो उत्तर वह लाई थी वह तो उसके पीछे से आती तेज़ तलवार की धार जैसी उस आवाज में ही उन्हें सूद समेत मिल गया.

”जाकर उनसे कह दो यहां कोई उनका बेटा – वेटा नहीं रहता । जिस गुरबत में उन्होने मुझे पाला पोसा, उसकी संकरी गली की बदबू से निकल कर अब मैं आजा़द आकाश का पंछी हो गया हूँ. मैं किसी रिश्ते – विश्ते को नहीं मानता. पैसा ही मेरा भगवान है. अगर उन्हें जरूरत हो तो कुछ उन्हें भी दे सकता हूँ जो उनकी पत्नी की जान बचा पायेगा शायद ………….!!” और उसके आगे वह कुछ न सुन पाया. खामोशियों के सन्नाटे से घिरा दीनानाथ लड़खड़ाते कदमों से वापस लौटा जैसे किसी पत्थर दिल से उनकी मुलाकात हुई हो ।

देवी नागरानी

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8 Comments »

  1. 1
    nirmla Says:

    आदरणीय़ प्राण शर्मा ज्र्र की कहानी का कई दिन से इन्तज़ार था कहानी मे कहीं उनके अपने जीवन की भी क्जलक दिखाइ देती है प्रेरणात्मक और सुन्दर कहानी के लिये प्राण जी को बहुत बहुत बधाई सकारात्मक सोच और आत्मशक्ति हो तो आदमी कुछ भी कर सकता है
    नागरानी जी नी बहुत बडिया तरीके से आज के सच को ब्यान किया है ।कितनी बदल गयी हैं मान्यतायें और हमारे संस्कार मार्मिक अभिव्यक्ति है बधाई और आपका् भी आभार इन रचनाओं को पढवाने के लिये

  2. 2

    दो दिग्गज लेखकों की रचनाएँ एक ही जगह पढने को मिलना किसी सुखद आर्श्चय से कम नहीं…प्राण साहेब कितनी सरलता से कहानी में कितना कुछ कह जाते हैं की हैरानी होती है…”हिम्मते मर्दां मददे खुदा” वाली बात सत्य हो गयी उनकी कहानी से…और दीदी नागरानी जी की कहानी मन को अन्दर तक छू गयी….शुक्रिया आपका महावीर इन दोनों की रचनाओं को एक साथ उपलब्द्ध करवाने के लिए…
    नीरज

  3. 3

    दोनों ही कहानियाँ सच के धरातल को व्यक्त करती हुई लगी…मन को छु गयी….जय माता की…

    regards

  4. 5
    Lavanya Says:

    DONO KAHANIYAAN , SACH KE DHARATAL SE JUDEE , BEHAD SASHAKT AUR PRABHAWSHALEE

    AABHAAR — PRASTUTI ATI UTTAM LAGEE —

    DEVI BAHEN < PRAN BHAI SAHAB , BADHAYEE KUBOOL KARIYEGA,

    SA SNEH < SADAR,

    – LAVANYA

  5. 6

    Mahavirji

    pranji ke Rachnatmak sansaar ke vistaar ke aage mera naman hai. Aap ne unke saath manch pradan karke jo maan diya hai uske liye tahe dil se shukrguzaar hoon aur sudhi pathakon ki bhi jo roz marra ki zindagi ke kisi mod par is satya se bhi parichit hote rahte hain aye din. Neeraj, Nirmala, arshia, Seemaji v adarneey Lavanya ji ki abhari hoon ise pasand karne ke liye.
    Devi Nangrani

  6. 7
    Harish Shewkani Says:

    बहुत ही अच्छी लघु कथा. धन्यवाद

  7. 8
    mohit Says:

    bahut aakarshit katha hain
    dhanyavaad


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