प्राण शर्मा जी की दो ग़ज़लें

प्राण शर्मा जी की दो ग़ज़लें

यारों से मुंह को मोड़ना कुछ तो ख़याल कर
बरसों की यारी तोड़ना कुछ तो ख़याल कर

अपनों से गांठ तोड़ना यूं ही सही मगर
गैरों से गांठ जोड़ना कुछ तो ख़याल कर

जग का ख़याल कर भले ही रात दिन मगर
घर का ख़याल छोड़ना कुछ तो ख़याल कर

उनके भी दिल धड़कने दे दिल की तरह तेरे
नित डालियां झंझोड़ना कुछ तो ख़याल कर

माना कि ज़िन्दगी से परेशान है तू पर
पत्थर से सर को फोड़ना कुछ तो ख़याल कर

जो कर गए हैं काम जहां में बड़े बड़े
नाम अपना उन से जोड़ना कुछ तो ख़याल कर

हाथों में तेरा हाथ लिया है किसी ने दोस्त
झटका के हाथ दौड़ना कुछ तो ख़याल कर

********

केवल फूल भला लगता है तेरा धोका है प्यारे
एक तराशा पत्थर भी तो सुंदर होता है प्यारे

ये एक बार उतर जाए तो लोगों का उपहास बने
मर्यादा जैसे नारी के तन का कपड़ा है प्यारे

सब कुछ ही धुंधला दिखता है तुझ को इस सुंदर जग में
लगता है तेरी आंखों में कुछ कुछ कचरा है प्यारे

दुख घेरे रहता है मन को सिर्फ़ इसी का रोना है
वर्ना हर इक के जीवन में सब कुछ अच्छा है प्यारे

रंग नया है, ढंग नया है, सोच नई और बात नई
तू भी बदल अब तो यह सारा आलम बदला है प्यारे

हर बाज़ार भरा देखा है आते जाते लोगों से
फिर भी हर इक का कहना है ख़ाली बटुवा है प्यारे

‘प्राण’ शर्मा

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13 Comments »

  1. 1
    MEET Says:

    अपनों से गांठ तोड़ना यूं ही सही मगर
    गैरों से गांठ जोड़ना कुछ तो ख़याल कर

    क्या बात है. बहुत आभार प्राण शर्मा जी की ग़ज़लें पढ़वाने का.

  2. 2

    एक से बढ़ कर क नायाब शेरों से भरी दोनों गज़लें लाजवाब हैं…अब प्राण साहेब के बारे में क्या कहें…गुरु हैं और गुरु ही रहेंगे…आप का तहे दिल से शुक्रिया उनका कलाम पढ़वा दिया…अच्छा लगा आप को अरसे बाद ब्लॉग लिखता देख कर उम्मीद है आप की आँख अब ठीक होगी.मेरा आप दोनों को प्रणाम.
    नीरज

  3. 3
    Lavanya Says:

    आदरणीय महावीर जी
    व प्राण भाई साहब,
    २ सुँदर गज़ल एक साथ पढकर बहुत आनँद आया –
    शुक्रिया !
    स स्नेह्,
    – लावण्या

  4. एक एक शेर पर वाह वाह!!

    अपनों से गांठ तोड़ना यूं ही सही मगर
    गैरों से गांठ जोड़ना कुछ तो ख़याल कर

    क्या बात है!! प्राण जी को पढ़ कर गंगा स्नान की अनुभूति होती है, मानो तर गये.

    महावीर जी, आपका बहुत आभार एवं साधुवाद!!

  5. आदरणीय प्राण जी
    ,

    माना कि ज़िन्दगी से परेशान है तू पर
    पत्थर से सर को फोड़ना कुछ तो ख़याल कर

    हर बाज़ार भरा देखा है आते जाते लोगों से
    फिर भी हर इक का कहना है ख़ाली बटुवा है प्यारे

    दोनों ही बेहतरीन गज़लें हैं, आपको पढ्ना एक अनुभव है।

    ***राजीव रंजन प्रसाद

  6. बेहतरीन गज़लें पढवाने का आभार।

  7. कुछ कह सकूँ प्राण शर्मा साब की रचना पर इतनी हैसियत तो नहीं रखता.हम तो इन्हें पढ़-पढ़ सीख रहे हैं…

  8. 8

    माना कि ज़िन्दगी से परेशान है तू पर
    पत्थर से सर को फोड़ना कुछ तो ख़याल कर ,

    एक बार उतर जाए तो लोगों का उपहास बने
    मर्यादा जैसे नारी के तन का कपड़ा है प्यारे

    ” WHAT TO SAY, HOW TO EXPRESS, I DONT KNOW, I AM SPEECHLESS, IT LOOKS LIKES LIFE IS FLOWING IN YOUR GAZALS, SO TOUCHING AND SOOTHING, I AM IMPRESSED.”

    REGARDS

  9. 9
    shyam Says:

    रंग नया है, ढंग नया है, सोच नई और बात नई
    तू भी बदल अब तो यह सारा आलम बदला है प्यारे
    savsth soch ka she`rbahut sundar ban pada hai badhyee

  10. प्राण जी की दोनों ही ग़ज़लें एक से एक बढ़ कर हैं।
    उनके भी दिल धड़कने दे दिल की तरह तेरे
    नित डालियां झंझोड़ना कुछ तो ख़याल कर
    वाह!
    ये एक बार उतर जाए तो लोगों का उपहास बने
    मर्यादा जैसे नारी के तन का कपड़ा है प्यारे
    इस शेर की तारीफ़ के लिए शब्द नहीं हैं। कमाल का शेर है।

  11. 11

    वाकई बहुत शानदार गज़लें
    बेहतरीन
    महावीर जी आपका भी शुक्रिया
    आपके परिवार, मित्रों एवं ब्लाग-मंडली को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

  12. 12
    mehek Says:

    अपनों से गांठ तोड़ना यूं ही सही मगर
    गैरों से गांठ जोड़ना कुछ तो ख़याल कर
    जग का ख़याल कर भले ही रात दिन मगर
    घर का ख़याल छोड़ना कुछ तो ख़याल कर
    waah bahut gazab ke sher,dono gazalbahut sundar

  13. दोनों ही गज़ल लाजवाब हैं

    सादर
    हेम ज्योत्स्ना


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