“हम गधे हैं” – नीरज त्रिपाठी

हम गधे हैं neeraj_tripathi.jpg

नीरज त्रिपाठी

एक दिन हुई एक गाधे से मुलाकात
हुई हमारी मित्रता, शुरू हुई बात
मैं ने पूछा गधे भाई
क्या आप वास्तव में गधे हैं
गधा बोला आपका प्रश्न सुनकर
लगता है कि आप गधे हैं

मै ने बात बिगड़ती देख
वार्तालाप को दूसरी ओर घुमाया
बहुत स्मार्ट लग रहे हो
गधे को बताया
गधे ने प्रशंसा के लिये
आभार जताया
खुश हो कर ढैंचू ढैंचू का
मधुर स्वर सुनाया

मैं ने पूछा गधे भाई
क्या कार्य-क्षेत्र है तुम्हारा
गधा बोला इम्पोर्ट ऐक्सपोर्ट का
व्यापार है हमारा
गधा बोला बहुत दिन बाद
मिला कोई अपने जैसा
क्या करते हो,
काम चल रहा है कैसा?

मैं बोला कविताएं लिखता हूं यार
गधा बोला अभी थोड़ा काम है
चलता हूं, नमस्कार!
मैं बोला मज़ाक कर रहा था यार

कम्प्यूटर के क्षेत्र में
करियर को दे रहा हूं नये आयाम
सुबह से लेकर शाम तक
तुम्हारी तरह करता हूं काम

गधा बोला वैसे कम्प्यूटर में
रुचि तो मेरी भी थी
लेकिन डैडी के व्यापार को
मेरी जरूरत थी

मैं बोला हम बेवकूफ़ इन्सान को
गधे कहते हैं
क्या तुम्हारी बिरादरी के लोग इस से
रुष्ट रहते हैं

गधा बोला इन्सान को गधा कहने पर
हमें नहीं विरोध
लेकिन गधे को इन्सान कहा
तो ईंट से ईंट बजा देंगे
दुलत्तियों की सज़ा देंगे
करेंगे प्रतिरोध

माना कि तुम्हारे यहां भी
कुछ लोग चारा खाते हैं
छोटे छोटे बच्चे हमारी तरह
बोझ उठाते हैं
और कुछ इन्सान वैसे ही गाते हैं
जैसे कि हम रैंकते हैं
लेकिन हमारे यहां
कोई थोड़ी सी भी बेईमानी करे
उसे बिरादरी से निकाल फेंकते हैं

टेढ़ों के लिये टेढ़े ,
सीधों के लिये सीधे हैं
गर्व है कि हम गधे हैं

गधे ने मुझ पर
कुछ यूं प्रभाव जमाया
मैं लगा सोचने भगवान ने मुझे
गधा क्यों नहीं बनाया

अब तो यही इच्छा है
कि ज़िन्दगी में कुछ ऐसा कर जाऊँ
समाज में, बिरादरी में
हर जगह गधा कहलाऊँ !

नीरज त्रिपाठी

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4 Comments »

  1. 1
    संजय त्रिवेदी Says:

    नीरज जी जो मजा बेवकूफ़ी में है वो होशियारी में तो बिलकुल भी नही। क्योंकि बेवकूफ़ को क्या बेवकूफ़ बनाओगे मजा तो तब है जब, होशियार को बेवकूफ़ बना कर दिखाओ’

  2. 2
    संजय त्रिवेदी Says:

    नीरज जी जो मजा बेवकूफ़ी में है वो होशियारी में तो बिलकुल भी नही। क्योंकि बेवकूफ़ को क्या बेवकूफ़ बनाओगे मजा तो तब है जब, होशियार को बेवकूफ़ बना कर दिखाओ’क्योकि वास्तव में गधे हैं । हम तो आपकी कविता हैं

  3. Neeraj ji aap ki rachna ne sochne par magboor kar deeya hai ki wastwa me ham ghdhe se bhi kam savedan sheel rah gaye hai


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