Archive for the ‘हास्य-रस/व्यंग्य’ Category

पति या कुत्ता

नीरज त्रिपाठी
पति या कुत्ता
नीरज त्रिपाठी
उस दिन शर्मा जी जब घर लौटे तो उन्होने देखा कि पूरे घर में सजावट थी और बड़ा सा केक भी रखा था, शर्मा जी के कुछ सोचने से पहले ही उनकी पत्नी नीलू जी ने अचानक प्रकट होते हुए कहा ‘…सरप्राइज।’ शर्मा जी ने सोचा कि उन्हें अपना [...]

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ठहरो अभी बताऊंगा

(सन् 1960 के पन्नों से)
इस दुनिया में आ कर साथी, देखो मैं ने सब कुछ पाया
पर एक चीज़ अब तक ना मिली ठहरो अभी बताऊंगा ।
जाड़े के ठण्डे मौसम में जब शीत पवन चल जाता है
सच कहता हूं यह बन्दा तो सर्दी में रोज़ नहाता है
एक थाल सजा, दीपक रख कर, लोटे में ले ठण्डा [...]

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अनिद्रा से विष्णु जी परेशान हैं!

नारद जी सोच रहे थे कि मृत्यु-लोक (पृथ्वी) में जाकर एक गिटार ले लिया जाए। युगयुगांतरों के समय की सीढ़ियां चढ़ चढ़ कर नारद जी के शरीर में अब पहले सी ऊर्जा नहीं रही थी। वीणा का भार और आकार दोनों ही वादन में कभी कभी आड़े आजते थे।
इसी गुनताड़े में नेत्र मुंदे हुए [...]

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ससुराल से पाती आई है !

ससुराल से पाती आई है !
ससुराल से पाती आई है !
बहुत हुए मैके में ही, सच तनिक न तबियत लगती है
भैया भाभी सो जाते हैं, लेकिन यह विरहन जगती है
कमरे की बन्द किवाङों से, मीठे मीठे स्वर आते हैं
वे प्यार की बातें करते हैं, अरमान मेरे जग जाते हैं
विश्वास करो मैं [...]

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“हम गधे हैं” – नीरज त्रिपाठी

‘ हम गधे हैं ‘ [...]

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