Archive for July 6th, 2009

देवी नागरानी की लघुकथा – भिक्षा-पात्र

भिक्षा पात्र
(लघुकथा)
देवी नागरानी
दरवाज़े पर भिक्षा दते हुए देवेन्द्र नारायण सोच रहे थे, ये सिलसिला कब तक चलेगा ? पिताजी के ज़माने से चलता आ रहा है ! दरवाज़े पर आए भिक्षुक को खाली हाथ न भेजो ! और बेख्याली में भिक्षा पात्र में न पड़कर नीचे ज़मीन पर गिरी। कुछ रूखे अंदाज़ से [...]

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