दीपा जोशी की दो कविताएं

नाम : दीपा जोशी
जन्मतिथि : 7 जुलाई 1970
स्थान : नई दिल्ली

शिक्षा : कला व शिक्षा स्नातक, क्रियेटिव राइटिंग में डिप्लोमा और रेडियो राइटिंग में PG.

कार्यक्षेत्र : भारतवर्ष के हृदय ‘दिल्ली’ में सूचना व प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत।

मासिक पत्रिकाओं व हिन्दी दैनिक में कुछ लघु लेखों व कविताओं का प्रकाशन।

अंग्रेज़ी में कुछ रचनाओं का प्रकाशन।

अन्य रुचि : संगीत सुनना व गुनगुनाना
dineshdeepa@yahoo.com

ब्लॉगः अल्प विराम
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आँसू

ये सच है कि
ये आँसू हैं
हमारे दोस्त हर दम
कभी गम तो कभी खुशी से
कर देते है आँखें नम

करते कभी
इनकी नमी से
वफा का एहसास
दो चाहने वाले मन
तो कभी
बेरूखी पर किसी की
बह उठते
दुख का सागर बन

माना कि
ये हैं मूक
पर इनकी आहों में भी
असर होता है
बहें जब दुआऍ बनकर
खंजर भी बेअसर होता है

रखना सहेज कर इनको
ताउम्र साथ निभायेंगें
छोड़ देंगें साथ
जब सभी अपने
ये ही है जो बाँहों का सहारा देंगें
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अश्रु नीर

यह नीर नहीं
चिर स्‍नेह निधि
निकले लेन
प्रिय की सुधि

संचित उर सागर
निस्‍पंद भए
संग श्‍वास समीर
नयनों में सजे

युग युग से
जोहें प्रिय पथ को
भए अधीर
खोजन निकले

छलके छल-छल
खनक-खन मोती बन
गए घुल रज-कण
एक पल में

दीपा जोशी

5 Responses to this post.

  1. बेहतरीन आत्‍माभिव्‍यक्ति।

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  2. बहुत आभार परिचय और इन उम्दा कविताओं के लिए.

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  3. Posted by pran sharma on October 7, 2008 at 4:27 pm

    Deepa joshi kee dono kavitaon mein sahaj
    abhivyakti hai.kavitayen man ko bharpoor
    chootee hain.Deepa jee ko badhaaee aur
    aashirvaad.

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  4. दीपा दी की कवितायें अच्छी लगीं

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  5. माना कि
    ये हैं मूक
    पर इनकी आहों में भी
    असर होता है
    बहें जब दुआऍ बनकर
    खंजर भी बेअसर होता है
    waah waah ati sundar,khanjar se badhar ansoon ka asar hota hai,sundar baat

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