27
Oct
Posted by महावीर in कविता. 11 Comments
दीपक की ज्योति की भांति आप सभी के जीवन भी सदैव उज्वलित रहें।
दीपावली के अवसर पर आप सब को शुभकामनाएं !
महावीर शर्मा
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‘दीवाली के दीप जले’ – रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी
कालजयी शायर रघुपति सहाय श्रीवास्तव ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी की एक ग़ज़ल
दे रहा हूं जिसका शीर्षक हैः “दीवाली के दीप जले”। फ़िराक़ गोरखपुरी को उनकी
कृति ‘गुले-नग़मा’ [...]
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20
Oct
Posted by महावीर in प्राण शर्मा. 13 Comments
प्राण शर्मा जी की दो ग़ज़लें
यारों से मुंह को मोड़ना कुछ तो ख़याल कर
बरसों की यारी तोड़ना कुछ तो ख़याल कर
अपनों से गांठ तोड़ना यूं ही सही मगर
गैरों से गांठ जोड़ना कुछ तो ख़याल कर
जग का ख़याल कर भले ही रात दिन मगर
घर का ख़याल छोड़ना कुछ तो ख़याल कर [...]
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6
Oct
Posted by महावीर in कविता. 5 Comments
नाम : दीपा जोशी
जन्मतिथि : 7 जुलाई 1970
स्थान : नई दिल्ली
शिक्षा : कला व शिक्षा स्नातक, क्रियेटिव राइटिंग में डिप्लोमा और रेडियो राइटिंग में PG.
कार्यक्षेत्र : भारतवर्ष के हृदय ‘दिल्ली’ में सूचना व प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत।
मासिक पत्रिकाओं व हिन्दी दैनिक में कुछ लघु लेखों व कविताओं का प्रकाशन।
अंग्रेज़ी में कुछ रचनाओं का प्रकाशन।
अन्य रुचि [...]
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