क़ातिल सिसकने क्यूं लगा – ग़ज़ल
ग़ज़ल का हर शे’र अपने आप में संपूर्ण और स्वतंत्र होता है। यह आवश्यक नहीं कि ग़ज़ल के एक शे’र का दूसरे शे’र के साथ समविषयक हो। हाँ, ग़ज़ल के सारे अशा’र एक ही बहरो-वज़न में होने चाहिए।
सोगवारों* में मिरा क़ातिल सिसकने क्यूं लगा
दिल में ख़ंजर घोंप कर, ख़ुद [...]
Archive for August, 2008
31 Aug
क़ातिल सिसकने क्यूं लगा – ग़ज़ल
23 Aug
कथा महोत्सव-2008
कथा महोत्सव-2008
अभिव्यक्ति, भारतीय साहित्य संग्रह तथा वैभव प्रकाशन द्वारा आयोजित
• अभिव्यक्ति, भारतीय साहित्य संग्रह तथा वैभव प्रकाशन की ओर से कथा महोत्सव २००८ के लिए हिन्दी कहानियाँ आमंत्रित की जाती हैं।
• दस चुनी हुई कहानियों को एक संकलन [...]
15 Aug
ब्रिटिश संसद में एक बार फिर गूंजी हिन्दी
यू.के. की डायरी सेः
स्वतन्त्रता-दिवस पर भारत और विभिन्न देशों में रहने वाले भारतीयों को हार्दिक
शुभकामनाएं।
महावीर शर्मा
‘ब्रिटिश संसद में एक बार फिर गूंजी हिन्दी’
(लंदन – 28 जून) ब्रिटिश संसद के उच्च सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में एक बार फिर गूंजी हिन्दी। ब्रिटिश सरकार के आंतरिक सुरक्षा राज्य मन्त्री टोनी मैक्नलटी ने शुक्रवार की शाम सुप्रसिद्ध लेखिका [...]
10 Aug
देवी नागरानी एक संवेदन शील कवियित्री – प्राण शर्मा
देवी नागरानी एक संवेदन शील कवियित्री
-प्राण शर्मा
‘प्रतिभाशाली और श्रेष्ट कवि कौन है?’ के उत्तर में गुरु ने कहा की प्रतिभाशाली और श्रेष्ट कवि वह है जिसके पास विपुल भाषा का भंडार हो, जिसके पास संसार का अनुभव ही अनुभव हो, जिसमें सॉफ-सुथरी कविता कहने की निपुणता हो, और जिसको छंदों- बहरों का पूरा ग्यान [...]
5 Aug
कल्पना और भाषा की अद्भुत पकड़
कल्पना और भाषा की अद्भुत पकड़:
देवी नागरानी जी का नया ग़ज़ल-संग्रह “दिल से दिल तक”
श्रीमती देवी नागरानी जी के अब तक दो ग़ज़ल-संग्रह “ग़म में भीगी ख़ुशी” और “चराग़े-दिल” प्रकाशित हो चुके हैं। तीसरे ग़ज़ल-संग्रह “दिल से दिल तक” का विमोचन महरिष ‘गुंजार समिति’ द्वारा आयोजित किए गए समारोह में ११ मई २००८ रविवार [...]









