Archive for June 16th, 2008

सुकवि प्राण शर्मा की ‘सुराही’ – एक ईमानदार और स्वस्थ दिशा-बोधक कृति

सुकवि प्राण शर्मा की ‘सुराही’ – एक ईमानदार और स्वस्थ दिशा-बोधक कृति

– डॉ० कुँवर बेचैन

भारतीय साहित्य में काव्य के क्षेत्र में मुक्तक परम्परा बहुत पुरानी है। कारण यह है कि प्रबंध काव्य में कवि को किसी बाहरी कथावस्तु पर आश्रित रह कर सृजन करना होता है जब कि मुक्तक काव्य में कवि को [...]

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