Archive for June, 2008

ग़ज़ल: हादसों के शहर में – ‘प्राण’ शर्मा

ग़ज़ल – हादसों के शहर में

सो रहा था चैन से मैं फ़ुर्सतों के शहर में
जब जगा तो ख़ुद को पाया हादसों के शहर में
फ़ासले तो फ़ासले हैं दो किनारों की तरह
फ़ासले मिटते कहाँ हैं फ़ासलों के शहर में
दोस्तों का दोस्त है तो दोस्त बन कर ही तू रह
दुश्मनों की कब चली [...]

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छोटी सी बिंदिया ! -3 क्षणिकाए

छोटी सी बिंदिया ! -3 क्षणिकाएं
- महावीर शर्मा
दुलहन

अलसाये नयनों में निंदिया, भावों के झुरमुट मचलाए
घूंघट से मुख को जब खोला, आंखों का अंजन इतराए
फूल पर जैसे शबनम चमके,दुलहन के माथे पर बिंदिया।
मुस्काए माथे पर बिंदिया।

मुजरा

तबले पर ता थइ ता थैया, पांव में घुंघरू यौवन छलके

मुजरे में नोटों की वर्षा, बार बार ही आंचल [...]

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सुकवि प्राण शर्मा की ‘सुराही’ – एक ईमानदार और स्वस्थ दिशा-बोधक कृति

सुकवि प्राण शर्मा की ‘सुराही’ – एक ईमानदार और स्वस्थ दिशा-बोधक कृति

– डॉ० कुँवर बेचैन

भारतीय साहित्य में काव्य के क्षेत्र में मुक्तक परम्परा बहुत पुरानी है। कारण यह है कि प्रबंध काव्य में कवि को किसी बाहरी कथावस्तु पर आश्रित रह कर सृजन करना होता है जब कि मुक्तक काव्य में कवि को [...]

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‘वह रात और अन्य कहानियाँ’ का लोकार्पण लंदन में

‘वह रात और अन्य कहानियाँ’ का लोकार्पण लंदन में

राकेश बी. दुबेः हिंदी एवं संस्कृति अधिकारी,भारतीय उच्चायोग, लन्दन, प्रज्ञा ‘सुरभि’ सक्सेना, उषा राजे सक्सेनाः लेखिका-’ वह रात और अन्य कहानियां ‘, अचला शर्माः लेखिका तथा निदेशक, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस रेडियो-हिंदी, लंदन, मोनिका मोहताः निदेशक, नेहरू केन्द्र, ‘प्राण’ शर्माः आलोचक-समीक्षक गज़लकार, महेश भार्द्वाजः प्रकाशक,सामयिक प्रकाशन, भारत
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चर्चित [...]

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उषा राजे सक्सेना – एक संवेदनशील कहानीकार

उषा राजे सक्सेना – एक संवेदनशील कहानीकार
नेहरू सैंटर, लंदन में ३० मई २००८ उषा राजे सक्सेना की कहानी संग्रह
‘वह रात और अन्य कहानियां’ के लोकार्पण के समय पर पढ़ा गया लेखः
- प्राण शर्मा
हिंदी कहानी में कुछ दशकों से कई रूप बदले हैं। उसे कभी नई कहानी, कभी प्रतीकात्मक कहानी, कभी सक्रिय कहानी, कभी सचेतन कहानी, [...]

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