Archive for May, 2008

‘प्राण’ शर्मा जी की एक ग़ज़ल

मेरे दुखों में मुझ पे ये अहसान कर गए
कुछ लोग मशवरों से मेरी झोली भर गए
पुरवाईयों में कुछ इधर और कुछ उधर गए
पेड़ों से टूट कर कहीं पत्ते बिखर गए
वो प्यार के ऐ दोस्त उजाले किधर गए
हर ओर नफ़रतों के अंधेरे पसर गए
अपने घरों को जाने के क़ाबिल नहीं थे जो
मैं सोचता हूं कैसे वो [...]

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वसीयत – कहानी

वसीयत – कहानी
लेखकः महावीर शर्मा
(साभारः सरिता, दिसंबर-प्रथम २००६)
सुबह नाश्ते के लिये कुर्सी पर बैठा ही था कि दरवाज़े की घण्टी बज उठी। उठने लगा तो सीमा ने कहा, “आप चाय पीजिये, मैं जाकर देखती हूं।” दरवाज़ा खोला तो पोस्टमैन ने सीमा के हाथ में चिट्ठी देकर दस्तखत करने को कहा,
“किस की चिट्ठी है?” मैंने बैठे [...]

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