(सन् 1960 के पन्नों से)
इस दुनिया में आ कर साथी, देखो मैं ने सब कुछ पाया
पर एक चीज़ अब तक ना मिली ठहरो अभी बताऊंगा ।
जाड़े के ठण्डे मौसम में जब शीत पवन चल जाता है
सच कहता हूं यह बन्दा तो सर्दी में रोज़ नहाता है
एक थाल सजा, दीपक रख कर, लोटे में ले ठण्डा [...]









