नारद जी सोच रहे थे कि मृत्यु-लोक (पृथ्वी) में जाकर एक गिटार ले लिया जाए। युगयुगांतरों के समय की सीढ़ियां चढ़ चढ़ कर नारद जी के शरीर में अब पहले सी ऊर्जा नहीं रही थी। वीणा का भार और आकार दोनों ही वादन में कभी कभी आड़े आजते थे।
इसी गुनताड़े में नेत्र मुंदे हुए [...]
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24 Apr









