“मेरा बेटा लौटा दो!!”-
(एक सत्य घटना पर आधारित कहानी)
महावीर शर्मा
लखनऊ में खटीक समुदाय की बस्ती से दूर जंगल में रामू की माँ चिलला चिल्ला कर दहाड़ रही थी, ” मेरा बेटा लौटा दो! मेरे रामू को लौटा दो!” रामू के बापू और साथियों ने जंगल का चप्पा चप्पा छान डाला, पर बालक का कोई पता [...]
Archive for March, 2007
28 Mar
“मेरा बेटा लौटा दो!!”
14 Mar
बुढ़ापा!
बुढ़ापा!
जवाँ जब वक़्त की दहलीज़ पर आंसू बहाता है,
बुढ़ापा ज़िंदगी को थाम कर जीना सिखाता है।
पुराने ख़्वाब को फिर से नई इक ज़िंदगी देकर,
अधूरे से पलों को फिर कहानी में सजाता है।
तजुर्बे उम्र भर के चेहरे की झुर्रियां बन कर,
किताबे-ज़िंदगी में इक नया अंदाज़ लाता है।
किसी के चश्म पुर-नम दामने-शब में अंधेरा हो,
बुझे दिल [...]









