महावीर

January 23, 2007

जब वतन छोड़ा……महावीर शर्मा

Filed under: उर्दू शायरी, महावीर शर्मा — महावीर @ 6:07 pm

जब वतन छोड़ा……
महावीर शर्मा

जब वतन छोड़ा, सभी अपने पराए हो गए
आंधी कुछ ऐसी चली नक़्शे क़दम भी खो गए

खो गई वो सौंधि सौंधी देश की मिट्टी कहां ?
वो शबे-महताब दरिया के किनारे खो गए

बचपना भी याद है जब माँ सुलाती प्यार से
आज सपनों में उसी की गोद में हम सो गए

गुल्लि डंडा खेलते, खिड़की किसी की टूटती
भागने का वो नज़ारा, पांव मोटर हो गए

दोस्त लड़ते जब कभी तो फिर मनाते प्यार से
आज क्यूं उन के बिना ये चश्म पुरनम हो गए!

किस कदर तारीक है दुनिया मिरी उन के बिना
दर्द फ़ुरक़त का लिए हम दिल ही दिल में रो गए

था मिरा प्यारा घरौंदा, ताज से कुछ कम नहीं
गिरति दीवारों में यादों के ख़ज़ाने खो गए

हर तरफ़ ही शोर है, ये महफ़िले-शेरो-सुखन
अजनबी इस भीड़ में फिर भी अकेले हो गए

महावीर शर्मा

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