Archive for January 9th, 2007

बीती रात का सपना – लावण्या

अंतर्मन की चिट्ठाकार लावण्या जिनकी रचनाएं अनेक जालघरों में सुशोभित हैं,
उनकी भावपूर्ण कविता ‘बीती रात का सपना’ प्रस्तुत हैः
बीती रात का सपना
लावण्या
बीती रात का सपना, छिपा ही रह जाये,
तो वो, सपना, सपना नहीँ रहता है!
पायलिया के घूँघरू, ना बाजेँ तो,
फिर,पायल पायल कहाँ रहती है?
बिन पँखोँ की उडान आखिरी [...]

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