Archive for January, 2007

जब वतन छोड़ा……महावीर शर्मा

January 23, 2007

जब वतन छोड़ा……
महावीर शर्मा
जब वतन छोड़ा, सभी अपने पराए हो गए
आंधी कुछ ऐसी चली नक़्शे क़दम भी खो गए
खो गई वो सौंधि सौंधी देश की मिट्टी कहां ?
वो शबे-महताब दरिया के किनारे खो गए
बचपना भी याद है जब माँ सुलाती थी मुझे

आज सपनों में उसी की गोद में हम सो गए
[...]

दिल की गीता

January 18, 2007

‘दिल की गीता’

महावीर शर्मा

घूमते घामते एक पुरानी किताबों की दुकान के भीतर चला गया। शेल्फ़ पर एक उर्दू की किताब पर निगाह अटक गई जिसकी जिल्द भी काफी पुरानी सी थी। कवर पर उर्दू में लिखा था:
‘दिल’ की गीता
उर्दू नज़्म में
ख़्वाजा दिल मुहम्मद एम.ए.
खोल कर [...]

बीती रात का सपना – लावण्या

January 9, 2007

अंतर्मन की चिट्ठाकार लावण्या जिनकी रचनाएं अनेक जालघरों में सुशोभित हैं,
उनकी भावपूर्ण कविता ‘बीती रात का सपना’ प्रस्तुत हैः
बीती रात का सपना
लावण्या
बीती रात का सपना, छिपा ही रह जाये,
तो वो, सपना, सपना नहीँ रहता है!
पायलिया के घूँघरू, ना बाजेँ तो,
फिर,पायल पायल कहाँ रहती है?
बिन पँखोँ की उडान आखिरी [...]

ग़ज़ल ‘याद है…..’महावीर शर्मा

January 3, 2007

भूल कर ना भूल पाए, वो भुलाना याद है
पास आये, फिर बिछड़ कर दूर जाना याद है
हाथ ज़ख्मी हो गए, इक फूल पाने के लिए
प्यार से फिर फूल बालों में सजाना याद है
ग़म लिए दर्दे-शमां जलती रही बुझती रही
रौशनी के नाम पर दिल को जलाना याद है
सूने दिल में गूंजती थी, मदभरी [...]