Archive for March, 2006

कौन ये? दीपा जोशी

March 16, 2006

कौन ये ? कौन बन प्रणय नाद विरह वेदना को तोड़ता है कौन जो श्वासों की डोर तोड़कर फिर जोड़ता।

कौन बन अश्रु तृषित लोचनों में डोलता है कौन जो लघु प्रणों में बन रुधिर दौड़ता ।

कौन बन संगीत मधु मिलन गीत बोलता है कौन जो पिघल श्वासों में मन के भेद खोलता ।

कौन बन दीप चिर तिमिर को घोलता है कौन जो निस्पंद उर को फिर जीवन की ओर मोड़ता….

दीपा जोशी 

हर इक हाथ में पत्थर क्यूं है

March 7, 2006

सुदर्शन “फ़ाकिर” की एक ग़ज़ल
आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूं है
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूं है

जब हक़ीक़त है कि हर ज़र्रे में तू रहता है
फिर ज़मीं पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूं है

अपना अंजाम तो मालूम है सब को फिर भी
अपनी नज़रों में हर इन्सान [...]