देवी नांगरानी की दो रचनाएं
टूटे हुए उसूल थे, जिनका रहा गुमाँ ॥ दीवार दर को ना सही अहसास कोई पर दिल नाम का जो घर मेरा यादें बसी वहाँ॥ नश्तर चुभोके शब्द के, गहरे किये है जख्म जो दे शफा सुकून भी, मरहम वो है कहाँ? झोंके से आके झाँकती है ये खुशी कभी [...]









