Archive for January, 2006

देवी नांगरानी की दो रचनाएं

January 15, 2006

 देवी नांगरानी की दो रचनाएं
  टूटे हुए उसूल थे, जिनका रहा गुमाँ ॥   दीवार दर को ना सही अहसास कोई पर   दिल नाम का जो घर मेरा यादें बसी वहाँ॥   नश्तर चुभोके शब्द के, गहरे किये है जख्म   जो दे शफा सुकून भी, मरहम वो है कहाँ?   झोंके से आके झाँकती है ये खुशी कभी [...]