बाल दिवस के अवसर पर श्रीमती सुभद्रा चौहान की एक कविताः
"बचपन" सुभद्रा चौहान
बारबार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया, ले गया तू जीवन की सब से मस्त खुशी मेरी।।
चिन्ता रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भुला जा सकता है बचपन का अतुलित [...]









