Archive for November 14th, 2005

“बचपन”सुभद्रा चौहान

November 14, 2005

बाल दिवस के अवसर पर श्रीमती सुभद्रा चौहान की एक कविताः
"बचपन" सुभद्रा चौहान
बारबार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया, ले गया तू जीवन की सब से मस्त खुशी मेरी।।
चिन्ता रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भुला जा सकता है बचपन का अतुलित [...]