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	<title>Comments on: ससुराल से पाती आई है !</title>
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		<title>By: अनुगूँज</title>
		<link>http://mahavir.wordpress.com/2005/05/18/sasural-se-paati/#comment-82</link>
		<dc:creator>अनुगूँज</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jun 2005 16:06:39 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;a href=&quot;http://www.akshargram.com/&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;&quot;अनुगूँज&quot;&lt;/a&gt; में रवि भाई कहते हैं -
&quot; चिट्ठियों के बीच ही, जीतू भाई ने भाई महावीर शर्मा की कविता “ससुराल से पाती आई है” का जिक्र किया. यह सारगर्भित, मजेदार, हास्य-व्यंग्य भरी कविता आपको हँसी के रोलरकोस्टर में बिठाकर यह बताती है कि प्रियतम की “ससुराल से पाती” “ससुराल की पाती” कैसे बन जाती है.
इस चिट्ठी की कुछ पंक्तियाँ मुलाहजा फ़रमाएँ:

ससुराल से पाती आई है !
पाती में बातें बहुत सी हैं, लज्जा आती है कहने में
जा कर बस लाना ही होगा, अब खैर नहीं चुप रहने में
—-
ससुराल के स्टेशन पर आ , मैं गाड़ी से नीचे आया
जब आंख उठा कर देखा तो टी.टी.आई सम्मुख पाया
मांगा उसने जब टिकट तो मैं बोला भैय्या मजबूरी है
कट गई जेब अब माफ करो , मुझ को एक काम ज़रूरी है
पर डाल हथकड़ी हाथों में , ससुराल की राह दिखाई है ।
ससुराल की पाती आई है ।।

उम्मीद है कि इस चिट्ठी से सीख लेकर, अब, हम, चाहे जितनी अर्जेंसी हो, चाहे जैसी भी प्यार भरी चिट्ठी तत्काल बुलावे का आए, अपनी यात्रा सोच समझ कर, जेबकतरों से सावधान रहकर करेंगे, नहीं तो हमारे ससुराल का पता बदलते देर नहीं लगेगी.&quot;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://www.akshargram.com/" rel="nofollow">&#8220;अनुगूँज&#8221;</a> में रवि भाई कहते हैं -<br />
&#8221; चिट्ठियों के बीच ही, जीतू भाई ने भाई महावीर शर्मा की कविता “ससुराल से पाती आई है” का जिक्र किया. यह सारगर्भित, मजेदार, हास्य-व्यंग्य भरी कविता आपको हँसी के रोलरकोस्टर में बिठाकर यह बताती है कि प्रियतम की “ससुराल से पाती” “ससुराल की पाती” कैसे बन जाती है.<br />
इस चिट्ठी की कुछ पंक्तियाँ मुलाहजा फ़रमाएँ:</p>
<p>ससुराल से पाती आई है !<br />
पाती में बातें बहुत सी हैं, लज्जा आती है कहने में<br />
जा कर बस लाना ही होगा, अब खैर नहीं चुप रहने में<br />
—-<br />
ससुराल के स्टेशन पर आ , मैं गाड़ी से नीचे आया<br />
जब आंख उठा कर देखा तो टी.टी.आई सम्मुख पाया<br />
मांगा उसने जब टिकट तो मैं बोला भैय्या मजबूरी है<br />
कट गई जेब अब माफ करो , मुझ को एक काम ज़रूरी है<br />
पर डाल हथकड़ी हाथों में , ससुराल की राह दिखाई है ।<br />
ससुराल की पाती आई है ।।</p>
<p>उम्मीद है कि इस चिट्ठी से सीख लेकर, अब, हम, चाहे जितनी अर्जेंसी हो, चाहे जैसी भी प्यार भरी चिट्ठी तत्काल बुलावे का आए, अपनी यात्रा सोच समझ कर, जेबकतरों से सावधान रहकर करेंगे, नहीं तो हमारे ससुराल का पता बदलते देर नहीं लगेगी.&#8221;</p>
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