इन्तज़ार! (उर्दू में एक बेतुकी कविता)
शब गुज़र ना जाये, है इन्तज़ार-ए-यार का
बस शौक़ है हमें तो दीदारे-यार का।
मन्ज़र जुदाईयों का देखा गया ना हम से
छुटता नहीं है दामन, अब ख्याले-यार का।
गोशाये-तन्हाई में तारीकी हर समत
दीदार होगा कैसे तस्वीरे-यार का।
डर है कहीं छीन ले अख्त्यारे-तसव्वर
तसव्वर ही है सहारा दिले-दाग़दार का।
तूफ़ान से तो लड़ने में लुत्फ़ ही और है
ले कर सहारा बह चले विसाले-यार का।
देखा है एक बारगी जलवाये-हुस्न-यार
भूलेगा न नज़ारा कूचाये-यार का।
ग़ैरों की बात का एतबार क्या करें
अब तो भरोसा ना रहा वफ़ाये-यार का।
इस लड़खड़ाती ज़िन्दगानी के सफ़र में
मिल जाये किसी मोड़ पर जलवाये-यार का।
ज़िन्दगी की शाम पर मिल जाये एक बार
रूह करेगी शुक्रिया अहसाने-यार का।।
महावीर शर्मा








Posted by Ajay Gangani on December 21, 2005 at 10:59 pm
From: “Ajay Gangani”
Date: April 9, 2005 12:19 pm
Subject: Re: SHAB GUZAR NA JAYE— Mahavir Sharma
Whaa subhan allah
aap ne bahut hi khub likha hai.. humen pahle bhi aap ko pada hai.. or
aap bahut hi khum likhate hain.. aaj aap ko is group main pad kar..
honsale bad gaye.. or kushi hai aap ko padate rahne ka muka hum
subko milta rahega..
Ajay
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Posted by rehana fazal chaand on December 21, 2005 at 11:01 pm
January 16th, 2005 at 11:57 pm e
Date: Sat, 27 Nov 2004 03:02:56 +0000 (GMT)
From:”rehana fazal”
Subject:Re: [eBazm] Shab guzar na jaaye…..Mahavir Sharma
To:
mahavir
bahut hi khubsurat kalam hai….meri bhi yehi dua hai ke shab guzar na jaaye……………….jitne jalwe sametna ho ,jitni aarzooon ko bahar banana ho sab isi shab ko naseeb ho…………likha kijiye…share kiya kijiye………………………
rehana fazal chaand
Posted by DEEPA JOSHI on December 21, 2005 at 11:03 pm
January 16th, 2005 at 11:53 pm e
From: DEEPA JOSHI
Date: Mon Jan 10, 2005 7:29 am
Subject: Re: [naisubha] SHAB GUZAR NA JAYE— Mahavir Sharma
wonderful………..
deepa
Posted by GULDEHELVE on December 21, 2005 at 11:04 pm
From: “GULDEHELVE”
Date: Sun Jan 9, 2005 12:32 pm
Subject: SHAB GUZAR NA JAYE ,,MAHAVIR SHARMA JI
ADAAB
AAP KA SWAGAT KHUSH AAMDEED
AAP KI GHAZAL KA BE SABRI SE INTIZAAR THAA
AAP KO PADH KAR KHUSHI HONE LAGI
ZINDAGI PHIR ZINDAGI HONE LAGI
AAP KA YEH SHYER BOHOT HI SUNDER HAI
manzar judaaiyon ka dekha gaya na hum se
chhut-ta nahiN hai daaman ab khyaal-e-yaar ka
AAP KI AUR GHAZLOOn
Posted by हिंदीचिट्ठाजगत on December 21, 2005 at 11:58 pm
बुधवार, मार्च १६, २००५
जिंदगी फिर जिंदगी होने लगी
आपको पढ़कर खुशी होने लगी,
जिंदगी फिर जिंदगी होने लगी.
यह कहना है महावीर शर्मा की गजल को पढ़कर उनके प्रशंसक गुलदेहलवीजी का जो उनकी गजल के इस शेर पर खासतौर पर फिदा हुये:-
मन्ज़र जुदाईयों का देखा गया ना हम से
छुटता नहीं है दामन, अब ख्याल-ए-यार का।
जिंदगी फिर जिंदगी होने लगी का यह अंदाज हावी रहा हिंदीचिट्ठाजगत में पिछले पखवाड़े निरंतर के प्रकाशन के बाद. सब तरफ से चिट्ठाजगत की पहली ब्लागजीन का स्वागत हुआ.अगले अंक की तैयारियां शुरु हैं जोरशोर से.आशा है दूसरा अंक और बेहतर निकलेगा.