महावीर

February 15, 2005

“तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास”दीपा जोशी

Filed under: कविता — महावीर @ 3:26 pm

अल्पविराम में भी देखिये

तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास

सागर मंथन निःशब्द प्रलाप
अनकही वेदना
हिय से उठती आह
इन पिघलते एहसासों ने रचा
तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास

    व्योम तकती आँखें
    निरंतर प्रमाद
    चिर संगिनी यादें
    नीरव पलों का साथ
    इन पिघलते एहसासों ने रचा
    तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास

      अनकही पहेली
      अनजानी तकरार
      न आई कभी बसंत
      न देखी कभी बहार
      इन पिघलते एहसासों ने रचा
      तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास

      दीपा जोशी

February 10, 2005

सारा चमन ही जल गया

Filed under: कविता, महावीर शर्मा — महावीर @ 6:36 pm

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दिसंम्बर 2004 में सुनामी के कहर पर एक कविताः-

      “सारा चमन ही जल गया”

      खुशियों का वो लम्हा था ग़म में बदल गया
      मुंह फाड़ कर सागर सुनामी विश्व को निगल गया ।
      लाखों ही बेघर हो गये, थे हर तरफ़ शव बेकफ़न
      आशियां का क्या करें सारा चमन ही जल गया।

    कैसे कहें सागर तुझे, लक्ष्मी माँ का जन्म-दाता
    माता की गोदें छीन कर, हंस हंस के तू मचल गया।

      मिटा सिंदूर मांगों से अट्टाहास का गरजना
      शिशुओं का हंसना खेलना ये सब तुझे क्यों फल गया?

    क्यों न तेरा दिल पसीजा देख बच्चों का तड़पना
    हृदय-विदारक दृश्य से पाषाण भी पिघल गया।

      पथराई सी निर्जीव आंखें घूरतीं घातक लहर को
      विध्वंस के इस खेल में, तुझ को बता क्या मिल गया?

    वेदना सुना रही भूकम्प की करुणा कहानी
    देव-गण भी रो पड़े, रुद्र का सिहांसन हिल गया।

    महावीर शर्मा



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      February 1, 2005

      मानव - दीपा जोशी

      Filed under: कविता — महावीर @ 6:50 pm

      मानव

      ये कैसी डगर है
      ये कैसा सफ़र है
      चले जा रहा है
      बढ़े जा रहा है
      ना कोई है साथी
      ना ही हम सफ़र है
      अकेले ना जाने कहां रहा है

        कँटीली हैं राहें
        ये बंजर चमन है
        मरुभूमि तय किए जा रहा है
        ना राह है कोई
        ना मंजिल है दिखती
        अन्धेरे में फिर भी
        बढ़े जा रहा है

      लहुलुहान तन है
      चंचल मन है
      अनदेखे कल से
      डरे जा रहा है
      पाने की आशा
      खोने का भय है
      इसी द्वंद में शायद जिए जा रहा है

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