अल्पविराम में भी देखिये
तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास
सागर मंथन निःशब्द प्रलाप अनकही वेदना हिय से उठती आह इन पिघलते एहसासों ने रचा तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास
व्योम तकती आँखें निरंतर प्रमाद चिर संगिनी यादें नीरव पलों का साथ इन पिघलते एहसासों ने रचा तुम्हारे व मेरे प्रेम [...]









