“तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास”दीपा जोशी
अल्पविराम में भी देखिये
तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास
सागर मंथन निःशब्द प्रलाप
अनकही वेदना
हिय से उठती आह
इन पिघलते एहसासों ने रचा
तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास
व्योम तकती आँखें
निरंतर प्रमाद
चिर संगिनी यादें
नीरव पलों का साथ
इन पिघलते एहसासों ने रचा
तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास
अनकही पहेली
अनजानी तकरार
न आई कभी बसंत
न देखी कभी बहार
इन पिघलते एहसासों ने रचा
तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहासदीपा जोशी






