Archive for February, 2005

“तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास”दीपा जोशी

February 15, 2005

अल्पविराम में भी देखिये
तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास
सागर मंथन निःशब्द प्रलाप अनकही वेदना हिय से उठती आह इन पिघलते एहसासों ने रचा तुम्हारे व मेरे प्रेम का इतिहास

व्योम तकती आँखें निरंतर प्रमाद चिर संगिनी यादें नीरव पलों का साथ इन पिघलते एहसासों ने रचा तुम्हारे व मेरे प्रेम [...]

सारा चमन ही जल गया

February 10, 2005

SELECTED BEST GHAZAL OF DAY – NAI SUBHA AND PUBLISHED IN ANUBHUTI.
दिसंम्बर 2004 में सुनामी के कहर पर एक कविताः-

“सारा चमन ही जल गया”

खुशियों का वो लम्हा था ग़म में बदल गया
मुंह फाड़ कर सागर सुनामी विश्व को निगल गया ।
लाखों ही बेघर हो गये, थे हर तरफ़ शव बेकफ़न
आशियां का क्या [...]

मानव – दीपा जोशी

February 1, 2005

मानव
ये कैसी डगर है
ये कैसा सफ़र है
चले जा रहा है
बढ़े जा रहा है
ना कोई है साथी
ना ही हम सफ़र है
अकेले ना जाने कहां रहा है
कँटीली हैं राहें
ये बंजर [...]