मेरी यह नज़म उर्दू “जगत” साप्ताहिक में 7. 10. 1964 के अंक में प्रकाशित हुई थी ।
(उर्दू की एक बेतुकी कविता)
जाम तोड़ दिया साक़ी ने, कोई बात नहीं,
आंखों से ही [...]
Archive for August, 2004
31 Aug
जाम तोड़ दिया साक़ी ने
20 Aug
उनकी अदा
मेरी यह नज़म उर्दू “मिलाप” साप्ताहिक (लन्दन) में 12. 7. 1967 के अंक में प्रकाशित हुई थी ।
“उनकी अदा” (एक बेतुकी कविता)
करके वादा भूल जाना, है अदा है ये ख़ास उनकी
गर दिलाया याद [...]









